बछवाडा़ (बेगूसराय):~
राकेश कु०यादव :~
14 जुलाई 2019
बछवाडा़ प्रखंड मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल अब पीएचसी नहीं रहा, बल्कि उसे अनुमंडल स्तरीय तीस बेड का कम्युनिटी हेल्थ सेन्टर के रूप में अपग्रेड किया जा चुका है।
मगर आप अगर अपने बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएँ या अन्य परिजनों को यहाँ ईलाज कराने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जांए। क्योंकि यहाँ मिलने वाली दवाईयाँ बेहतर की जगह बेअसर हो सकती है अथवा जहर भी हो सकती है।
इन सारे वाकयों का प्रमाण तब मिला जबर ग्राम कचहरी रानी 01 के पंच ब्यूटी कुमारी अपने दो साल के बेटे कुशाग्र का ईलाज कराने अस्पताल पहुंची। काउंटर से पर्ची कटाने के बाद डाॅक्टर्स चेम्बर में जाकर अपने बच्चे का चेकअप कार्यरत चिकित्सक से करवा कर दवा वितरण काउंटर पर गयी।

जहां बच्चे को दी गयी दवाओं का एक्सपायरी डेट 07/2019 था। तत्पश्चात उक्त महिला नें दवा वितरण काउंटर पर कार्यरत फर्मासिस्ट को दवा एक्सपायर होने की बात बताई। इस पर कार्यरत फर्मासिस्ट विफर पडा़। कहने लगा कि दवाओं के बारे में हमसे ज्यादा कौन जानता है। यही दवा सही काम करेगी। तत्पश्चात घर जाकर जब दवाओं की खुराक बच्चे को देना शुरू किया तो देर रात बच्चे का शरीर ठंढा़ एवं शरीर में खुजली होने लगी।
आनन-फानन में बच्चे का ईलाज नीजी क्लिनिक में कराया गया। तब जाकर बच्चे की हालात में सुधार हो सका।
मामले को लेकर सीएस बेगूसराय नें कहा कि आम तौर पर दवाईयाँ एक्सपायर होने के बाद रोगों के लिए बेअसर होती है। इसका मतलब यह नहीं की वह जहर हो गया। उपरोक्त बच्चे की हालात खराब होने का कारण दवाओं का रिएक्शन करना हो सकता है।

