@ किला-संग्रहालय का किया निरीक्षण, ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल
जगदीशपुर/भोजपुर– 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह की ऐतिहासिक धरती जगदीशपुर बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन से एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में रही। मुख्यमंत्री ने जगदीशपुर स्थित वीर कुंवर सिंह किला-संग्रहालय का भ्रमण कर ऐतिहासिक धरोहरों, संग्रहालय में संरक्षित सामग्री और परिसर की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने जगदीशपुर में वीर कुंवर सिंह की 80 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा भी की है।
वीर कुंवर सिंह का जगदीशपुर किला बिहार के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के अनुसार जगदीशपुर वीर कुंवर सिंह का जन्मस्थान है और किला 1857 के विद्रोह से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है।
*राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की मांग*
जगदीशपुर के स्थानीय विधायक एवं बिहार सरकार में योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने चुनाव के दौरान वीर कुंवर सिंह के किले को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित कराने की बात कही थी। मुख्यमंत्री के जगदीशपुर दौरे और किला-संग्रहालय के निरीक्षण को इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान ऐतिहासिक किला-संग्रहालय के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटकीय विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी ली गई। इससे स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद बढ़ी है कि जगदीशपुर की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जिला प्रशासन ने किला-संग्रहालय परिसर में साफ-सफाई, रंग-रोगन, लाइटिंग और अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम कराया था।
*1857 के संग्राम में वीर कुंवर सिंह की ऐतिहासिक भूमिका*
बाबू वीर कुंवर सिंह ने करीब 80 वर्ष की आयु में 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के खिलाफ मोर्चा संभाला था। भोजपुर जिला प्रशासन के अनुसार 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के निकट हुई उनकी अंतिम लड़ाई में अंग्रेजी सेना को पीछे हटना पड़ा और वीर कुंवर सिंह ने जगदीशपुर किले पर अपना ध्वज फहराया। 26 अप्रैल 1858 को उनका निधन हुआ।
इसी ऐतिहासिक विरासत के कारण जगदीशपुर का किला आज भी स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने भी इसे वीर कुंवर सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में दर्ज किया है।
*स्थानीय कला और उत्पादों के स्टॉल का भी अवलोकन*
मुख्यमंत्री ने दौरे के दौरान विभिन्न कलात्मक उत्पादों एवं स्थानीय सामग्रियों से जुड़े आकर्षक स्टॉलों का भी अवलोकन किया। इससे स्थानीय कला, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं को भी बल मिला।
कार्यक्रम में मंत्री श्री संजय सिंह ‘टाइगर’, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, जदयू विधायक राधाचरण सेठ, कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार तथा निदेशक कृष्ण कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
*एनडीए कार्यकर्ताओं में भी दिखा उत्साह*
मुख्यमंत्री के जगदीशपुर आगमन को लेकर एनडीए कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखा गया। जदयू जगदीशपुर प्रखंड अध्यक्ष अनूप पटेल, जदयू जिला अध्यक्ष भीम सिंह पटेल, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के जिला अध्यक्ष रोहित कुशवाहा, जगदीशपुर विधायक प्रतिनिधि संजय यादव, पूर्व मुखिया नीरज कुशवाहा, जदयू महिला नेत्री पुष्पा कुशवाहा, भाजपा नेता सुषमलता कुशवाहा समेत विभिन्न दलों के स्थानीय कार्यकर्ता एवं समर्थक मौजूद रहे।
*पर्यटन मानचित्र पर जगदीशपुर को नई पहचान मिलने की उम्मीद*
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें किला-संग्रहालय के प्रस्तावित विकास कार्यों पर टिकी हैं। यदि संरक्षण, सौंदर्यीकरण, संग्रहालय विस्तार, पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय कला-उत्पादों को एकीकृत तरीके से विकसित किया जाता है तो जगदीशपुर को बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन केंद्रों में और मजबूत पहचान मिल सकती है।
वीर कुंवर सिंह की वीरगाथा से जुड़ा यह किला केवल एक ऐतिहासिक भवन नहीं, बल्कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से जुड़ा स्थल है। मुख्यमंत्री के दौरे से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास को लेकर नई उम्मीद पैदा हुई है।
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