मंझौल-बेगूसराय ::–
अविनाश कुमार गुप्ता ::–
18 जून 2020 गुरुवार
कोरोना महामारी से पूरा विश्व त्रस्त है। इस महामारी से बचने के लिए कुछ उपायों को करना अति आवश्यक है। इसके साथ ही हमें अगर इस बीमारी का लक्षण हो तो स्वास्थ्य विभाग या अपने नजदीकी हॉस्पिटल से संपर्क करना चाहिए। संकट में जहां सभी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे बंद हो गए थे। लेकिन सरकारी हॉस्पिटल किसी मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे से बढ़कर हो गया था।
लेकिन इस दौर में मंझौल अनुमंडल मुख्यालय स्थित रेफरल अस्पताल अपने उद्धारक की बाट जोह रहा है। इस अस्पताल का मुख्य भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी कोई अनहोनी घटना घटित हो सकती है। फिलहाल अस्पताल परिसर में निर्मित चिकित्सकों के आवासीय परिसर में मरीजों का देखरेख किया जाता है।
चिकित्सा पदाधिकारी अनिल प्रसाद ने बताया कि अस्पताल का मुख्य भवन जर्जर हो गया है। जिसे देखते हुए अभियंताओं ने इस भवन में काम करने से मना कर दिया। जिसके कारण फिलहाल आवासीय परिसर में इलाज किया जा रहा है। जहाँ जगह की कमी के कारण मरीजों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि यहाँ फार्मासिस्ट एवं ड्रेसर के सृजित पद खाली हैं। यहाँ कुल चार चिकित्सक कार्यरत हैं। लेकिन फिलहाल मैं ही अकेले कार्यरत हूँ। शेष चिकित्सक की ड्यूटी कोरोना महामारी के कारण आइसोलेशन वार्ड में लगा दी गई है।
ऐसा नहीं है कि मंझौल रेफरल हॉस्पिटल का बिल्डिंग बनने के कगार पर है। अगर विभागीय उदासीनता नहीं होता तो अब तक उसमें इलाज भी शुरू हो गया रहता। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ऐसी उदासीनता शायद ही कहीं देखने को मिले जिस कारण अर्ध निर्मित भवन भी अब जर्जर होने के कगार पर है।


