शहीद-ए-आजम भगत सिंह विचार मंच के तत्वावधान में भगत सिंह की जयंती समारोह का आयोजन सूरज भवन, बेगूसराय में प्रोफेसर लाल बहादुर सिंह की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगत सिंह के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर की गई।
समारोह का संचालन करते हुए विचार मंच के महासचिव ललन लालित्य ने कहा कि भगत सिंह सच मायने में मानव धर्म के उपासक थे। उन्होंने मानवता को मानव का सबसे प्रमुख लक्षण माना और ऐसे समाज की कल्पना की, जिसमें मानव द्वारा मानव का शोषण समाप्त हो।
मंच के उपाध्यक्ष संतोष ईश्वर ने भगत सिंह को क्रांतिकारियों का नायक बताया। उपाध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि भगत सिंह सांप्रदायिकता को समाज का सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। कार्यकारिणी सदस्य अनिल अंजान ने कहा कि वर्तमान समय में भगत सिंह के विचार और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी दिशा में ले जाया जा रहा है, जहां सवाल पूछने पर भी देशद्रोही साबित करने का प्रयास किया जाता है।
कार्यकारिणी सदस्य राम कुमार ने कहा कि भगत सिंह के विचार सर्वकालीन अनुकरणीय हैं, क्योंकि उनके विचारों में स्वाभिमान के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी देखने को मिलता है। अंकित आनंद ने कहा कि भगत सिंह के विचार कभी मर नहीं सकते, क्योंकि उनमें निःस्वार्थ देशप्रेम की भावना निहित है।
अध्यक्ष प्रोफेसर लाल बहादुर सिंह ने कहा कि भगत सिंह के विचारों को विचार मंच के माध्यम से गांव-कस्बों तक पहुंचाने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान समय में बच्चों की तार्किक शक्ति कमजोर होती जा रही है।
पुष्कर प्रसाद सिंह ने भगत सिंह को भारत का चे-ग्वारा बताया, जबकि डॉ. संजय भारद्वाज ने उन्हें असली अहिंसक स्वतंत्रता सेनानी बताया। राम कल्याण सिंह ने कहा कि भगत सिंह के रास्ते पर चलकर ही ऐसा समाज बनाया जा सकता है, जहां जाति और धर्म के नाम पर इंसानों को आपस में लड़ाया न जा सके।
इस अवसर पर अधिवक्ता राज नारायण सिंह ने गीत प्रस्तुत कर भगत सिंह को याद किया। वहीं राम सुंदर सिंह, विजय सिंह, फुलेना रजक, सनी कुमार, नवीन कुमार सिंह, दीपक कुमार और संतोष कुमार ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में कवि अमन कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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