न्यूज़ डेस्क, बेगूसराय, राकेश यादव।।
बेगूसराय जिले के बछवाड़ा थाना क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन और पुलिसकर्मियों से मिलीभगत के आरोपों को लेकर मामला चर्चा में है। अवैध खनन में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहे एक व्यक्ति ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), बेगूसराय के डीआईजी और एसपी को लिखित आवेदन देकर थाने में कार्यरत एक चौकीदार पर कथित रूप से प्रतिदिन रुपये वसूलने और ट्रैक्टर चालकों को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। मामले की जांच बेगूसराय एसपी के निर्देश पर तेघड़ा इंस्पेक्टर को सौंपी गई है।

प्रतिदिन एक हजार रुपये लेने का आरोप
आवेदनकर्ता की पहचान दादुपुर पंचायत के वार्ड संख्या-13 निवासी दामोदर सिंह के पुत्र नितीश कुमार के रूप में बताई गई है। उन्होंने बछवाड़ा थाने में कार्यरत चौकीदार दीपक कुमार पासवान पर आरोप लगाया है कि कथित अवैध मिट्टी खनन के एवज में उनसे प्रतिदिन एक हजार रुपये लिए जाते थे।
आवेदक का दावा है कि कथित भुगतान का कुछ हिस्सा नकद और कुछ हिस्सा फोन-पे के माध्यम से किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित भुगतान के उद्देश्य की जांच होना बाकी है।
तीन ट्रैक्टर पकड़े जाने के बाद 35 हजार रुपये के लेन-देन का दावा
नितीश कुमार के अनुसार, एक बार पुलिस ने मिट्टी लदे उनके तीन ट्रैक्टर पकड़े थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसके बाद कथित तौर पर 35 हजार रुपये के लेन-देन के जरिए दो ट्रैक्टर चालकों को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने में चौकीदार की भूमिका रही।

आवेदक ने अपने आवेदन में इस कथित लेन-देन से संबंधित वीडियो सहित अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने का दावा किया है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें दर्ज घटनाक्रम और कथित लेन-देन के वास्तविक उद्देश्य की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
एसपी के निर्देश पर जांच, आवेदक ने जताया असंतोष
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेगूसराय एसपी ने जांच की जिम्मेदारी तेघड़ा इंस्पेक्टर जयप्रकाश यादव को सौंपी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच अधिकारी ने आवेदक से आवश्यक पूछताछ की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
आवेदक का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन भुगतान से संबंधित बैंक विवरण और अन्य साक्ष्य जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। हालांकि, उन्होंने जांच की दिशा और निष्पक्षता को लेकर असंतोष भी जताया है। उनका आरोप है कि मामले को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने के बजाय संबंधित चौकीदार को राहत देने की कोशिश हो सकती है।


