न्यूज़ डेस्क, भोजपुर-बक्सर, बबलू कुमार।।
@राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा मनोज उपाध्याय को भोजपुर बक्सर वार्ड संघ सदस्यों का समर्थन मिला, लड़ाई होगा त्रिकोणात्मक
भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव में इस बार मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणात्मक होता दिखाई दे रहा है। जहां एक ओर एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी कन्हैया प्रसाद और महागठबंधन समर्थित राजद उम्मीदवार सोनू कुमार राय आमने-सामने हैं, वहीं निर्दलीय उम्मीदवार मनोज उपाध्याय ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनोज उपाध्याय की सक्रियता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती पकड़ ने इस चुनाव को सीधी लड़ाई से निकालकर त्रिकोणात्मक बना दिया है।

भोजपुर और बक्सर के स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के वोट पर आधारित इस चुनाव में कुल छह प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य चर्चा तीन चेहरों के इर्द-गिर्द घूम रही है। जदयू के कन्हैया प्रसाद को एनडीए का पूरा समर्थन प्राप्त है, जबकि राजद के सोनू राय महागठबंधन के दम पर चुनावी मैदान में मजबूती से डटे हुए हैं। इसी बीच निर्दलीय उम्मीदवार मनोज कुमार उपाध्याय ने कई पंचायत प्रतिनिधियों, वार्ड सदस्यों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाकर दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी मनोज उपाध्याय भोजपुर बक्सर वार्ड संघ के साथ घूम कर वार्ड सदस्यों के बीच रहकर जो चुनाव की तैयारी किया था जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मनोज उपाध्याय को मिलने वाला समर्थन चुनाव के अंतिम परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। कई ऐसे वोटर जो पारंपरिक रूप से किसी दल विशेष के साथ माने जाते थे, वे इस बार स्थानीय समीकरण और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर मतदान करने की तैयारी में हैं। यही कारण है कि दोनों बड़े गठबंधन अब अपने-अपने पक्ष में मतों का ध्रुवीकरण कराने में जुट गए हैं।

इस चुनाव में परिवारवाद और राजनीतिक विरासत का मुद्दा भी खूब चर्चा में रहा। कन्हैया प्रसाद और सोनू राय दोनों राजनीतिक परिवारों से जुड़े माने जाते हैं, जबकि मनोज उपाध्याय खुद को स्थानीय जनप्रतिनिधियों की आवाज बताकर चुनाव लड़ रहे हैं। इससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
मतदान के दौरान भी कई जगहों पर राजनीतिक तनाव देखने को मिला। आरा और बक्सर के कुछ मतदान केंद्रों पर हंगामे की खबरें सामने आईं, आरा सदर प्रखंड में मतदान केंद्र के अंदर कुछ जनता दल यूनाइटेड के समर्थक रहने के कारण राजद उम्मीदवार सोनू राय ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। प्रशासन ने हालांकि स्थिति को नियंत्रित कर मतदान प्रक्रिया जारी रखी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि मनोज उपाध्याय अपेक्षा से अधिक वोट हासिल करने में सफल होते हैं, तो इसका सीधा असर कन्हैया प्रसाद और सोनू राय दोनों के जीत-हार के समीकरण पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव अब बिहार की राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। 14 मई को होने वाली मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि त्रिकोणात्मक संघर्ष में जीत का ताज किसके सिर सजता है।

