न्यूज़ डेस्क, बेगूसराय, विजय कुमार सिंह।।
महात्मा गांधी के ऐतिहासिक एवं गौरवशाली दांडी नमक सत्याग्रह की 96वीं वर्षगांठ के अवसर पर “गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति”, बेगूसराय की टोली आज पाँचवीं बार दांडी पहुँची। दांडी स्थित राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर समिति ने बेगूसराय एवं बिहार की गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई तथा बापू एवं समस्त सत्याग्रहियों को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

समिति के संस्थापक सह राष्ट्रीय महासचिव राजीव कुमार के नेतृत्व में यह टोली बेगूसराय से 31 मार्च को रवाना होकर 05 अप्रैल को गांधीजी के पावन व ऐतिहासिक साबरमती आश्रम पहुँची। यहाँ सर्वप्रथम बापू को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया, तत्पश्चात आश्रम का विधिवत अवलोकन एवं अध्ययन किया गया। इसके साथ ही यहां सरकार और व्यवस्था को जागरूक करने के उद्देश्य से एक सांकेतिक सत्याग्रह भी किया गया।

समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश यादव ने बताया कि इस सांकेतिक सत्याग्रह के दो प्रमुख उद्देश्य हैं- प्रथम, स्वतंत्रता संग्राम की अनमोल विरासत एवं आधुनिक बिहार के निर्माता “बिहार केसरी” की कर्मभूमि गढ़पुरा के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह स्थल का सरकारी घोषणा के अनुरूप समुचित विकास सुनिश्चित करवाना; तथा द्वितीय, महान स्वतंत्रता सेनानी, अखंड बिहार के प्रधानमंत्री, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री एवं आधुनिक बिहार के निर्माता “बिहार केसरी” डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा (श्रीबाबू) को भारत रत्न सम्मान से सम्मानित करवाना है।

समिति के महासचिव रमेश महतो एवं सचिव मुकेश विक्रम यादव ने बताया कि दांडी स्थित राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक के प्रधान श्री कालू भाई ने बेगूसराय से पहुँचे समस्त सत्याग्रहियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने दांडी मार्च एवं सत्याग्रह पर प्रकाशित एक विशेष पुस्तिका तथा दांडी नमक सत्याग्रह स्थल पर निर्मित नमक भेंट कर अतिथियों का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि श्रीबाबू के समकक्ष व डिजर्विंग कई मुख्यमंत्रियों को ,जिनका स्वतंत्रता संग्राम व तत्पश्चात राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान था, उन सभी को भारत रत्न सम्मान से नवाजा गया। यहां तक अब प्रोफेशनल प्लेयर्स और आर्टिस्ट भी इस सम्मान से सम्मानित हो रहे हैं । पर जिन्होंने आजादी की लड़ाई में लगभग आठ साल अंग्रेजी हुकूमत के विभिन्न जेलों में यातनाएं सहीं, जिन्होनें दलितों को मंदिर प्रवेश का अधिकार सुनिश्चित करवाया, जिन्होंने जाति की राजनीति को जूते की नोक पर रखकर, देश में सर्वप्रथम जमींदारी उन्मूलन कानून बनाकर लागू करवाया, कोई बैंक खाता नहीं रखा, परिवार को राजनीति क्या … सीएम हाउस की जगह किराये के मकान में रखा, अपने शासनकाल में बीमारी कहे जानेवाले प्रदेश- बिहार को देश का सर्वश्रेष्ट शासित राज्य व बेस्ट ग्रेविटी इकोनॉमि वाला प्रदेश बनाया, जिन्होंने टाल से नेपाल के बीच की नदियों के डूब क्षेत्र- बेगूसराय को “बिहार का औद्योगिक राजधानी” बनाने का अतुलनीय कार्य किया… ऐसे महापुरुष को आज तक “भारत रत्न सम्मान ” से सम्मानित नहीं करना बेहद आश्चर्यजनक, दुखद व चिंताजनक है । यह “बिहार केसरी” ,बिहारी अस्मिता और बिहारियों के अपमान के जैसा है । उन्होंने सरकार से अविलंब सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया ।

राजीव कुमार ने बताया कि वर्ष 2012 से प्रारम्भ “नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा” एवं “बिहार केसरी-भारत रत्न सम्मान अभियान” की जानकारी पाकर श्री कालू भाई ने प्रसन्नता व्यक्त की और समिति का उत्साहवर्धन किया। समिति के आग्रह पर उन्होंने भविष्य में गढ़पुरा आने की सहमति भी प्रदान की। इस अवसर पर श्री कालू भाई ने कर्नाटक निवासी विश्वनाथ कुलकर्णी से भी भेंट करवाई, जो साबरमती से 390 किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर उसी दिन दांडी पहुँचे थे। समिति की टोली ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

