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महिलाएं देशभक्ति, राजनीति, शिक्षा और समाज सेवा सहित हर क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बना रही : सरिता सुल्तानिया

न्यूज़ डेस्क, बेगूसराय, विजय कुमार सिंह।।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था संस्कार संस्कृति के तत्वावधान में रविवार को सुल्तानिया हाउस, मारवाड़ी मोहल्ला में विचार गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना था। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं महिलाओं ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए।

 

परिचर्चा में स्वास्थ्य क्षेत्र से डॉ. मीरा सिंह और डॉ. गीता कुमारी, शिक्षा क्षेत्र से डॉ. सहर अफरोज और सुमी जी, खेल क्षेत्र से रीना झा, राजनीति क्षेत्र से संजन जायसवाल, साहित्यिक क्षेत्र से रंजना सिंह, कला क्षेत्र से अंजली प्रिया तथा सांस्कृतिक क्षेत्र से किशोरी मिश्रा उपस्थित रहीं। सभी ने नारी उत्थान, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी सरिता सुल्तानिया ने की। उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का गुलाब का पुष्प भेंट कर स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं केवल घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभक्ति, राजनीति, शिक्षा और समाज सेवा सहित हर क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माननीय महापौर पिंकी देवी ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए अहंकार का त्याग कर अच्छे संस्कारों को अपनाना आवश्यक है। जब महिलाओं को सम्मान, शिक्षा और समान अवसर प्राप्त होते हैं, तभी समाज सच्चे अर्थों में प्रगति करता है।

इस अवसर पर रीना झा ने कहा कि आज की महिला अपनी प्रतिभा और परिश्रम से हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही है। वहीं डॉ. सहर अफरोज ने कहा कि नारी सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा, जब महिलाएं स्वयं अपने अधिकारों और हक के प्रति जागरूक होकर आगे आएंगी और आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभाएंगी।

रंजना सिंह ने कहा कि केवल लड़कियों के अधिकारों की चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन अधिकारों को व्यवहार में लागू करना भी आवश्यक है। अंजली प्रिया ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक दिन उनके प्रति सम्मान और समानता का भाव होना चाहिए।
वहीं किशोरी मिश्रा, संजन जायसवाल और सुमी जी ने कहा कि लड़कियां केवल घर-गृहस्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी प्रतिभा और हुनर से समाज में नई पहचान बना रही हैं और अपने व्यक्तित्व को निरंतर निखार रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समाज में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। अंत में संस्था संस्कार संस्कृति की ओर से सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

By National News Today

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