न्यूज़ डेस्क, बेगूसराय, विजय कुमार सिंह।।
@ “चौखंडी” बेगूसराय की लेनिनग्रादीय विरासत का इतिहास है”– नूतन आनंद
डॉ भगवान प्रसाद सिन्हा की क्षेत्रीय इतिहास पर लिखित पुस्तक “चौखंडी”: (लाल मटिहानी: भुसारी का पेइचिंग) किताब के विमोचन के अवसर केडीएम होटल के सार्वजनिक सभागार में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए प्रगतिशील लेखक संघ की राज्य सचिव नूतन आनंद ने चौखंडी को अपना पारिवारिक घर बताते हुए उसके महत्वपूर्ण पात्र बाबूजी दीप नारायण राय को याद किया और चौखंडी की क्रांतिकारी विरासत बेगूसराय की लेनिनग्रादीय विरासत से जुड़ा बताया .

अपने दिलचस्प कहानियों की शुरुआत करते हुए प्रोफेसर मटुक नाथ चौधरी ने कहा कि वर्तमान ही सार्वभौम है. इसके चिंतन से इतिहास जीवित होता है अन्यथा वह कब्र में पड़ा मुर्दा है. भविष्य कल्पना है उसे पूरा करने का दायित्व वर्तमान पर ही होता है . वर्तमान का चिंतन साहित्य है जो इतिहास को जिंदा और भविष्य को भरता है. चौखंडी में लेखक ने चिंतन से इतिहास को जीवित किया है.
अपने वक्तव्य की पुष्टि में उन्होंने कॉमरेड चंद्रशेखर के भाषण के बारे में लिखे अनुच्छेद को पढ़ते हुए कहा कि इस पुस्तक में इतिहास के स्थूल तथ्य और साहित्य की सूक्ष्म जैविकता दोनों समाहित है.
प्रोफेसर चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने शुरुआत करते हुए पूरी किताब की सारगर्भित समीक्षा पेश की . उन्होंने ‘चौखंडी’ के पात्रों की तुलना राम वृक्ष बेनीपुरी रचित “माटी की मूरतें” के पात्रों से की .

सीटू के पूर्व महासचिव एवं सीपीआई एम केंद्रीय कमेटी के पूर्व सदस्य कॉमरेड ने अपने ओजस्वी भाषण में मौज़ूदा दौड़ के राजनीतिक-आर्थिक संकट में “‘चौखंडी'” जैसी पुस्तक का लेखन वर्ग संघर्ष का इतिहास ही वास्तविक इतिहास के सत्य को चरितार्थ करता है .
राजद के यशस्वी विधान पार्षद डॉ अजय कुमार एम एल सी ने अलोकतांत्रिक हो रहे फ़िज़ा में पुस्तक के इस विमोचन समारोह को एक प्रकाश स्तंभ बताया जो नयी पीढ़ी को ज़रूर कुछ न कुछ रास्ता दिखायेगा. उन्होंने अपने गंभीर उद्बोधन में सरकार और व्यवस्था को आँकड़ों के साथ घेरने का प्रयास किया.
जाने माने सोशल साइंटिस्ट डॉ.अनिल राय ने कहा कि “चौखंडी” पुस्तक से स्थानीय ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्द्धन में भी मदद मिलेगी .

मुंगेर विश्वविद्यालय के प्रो.डॉ. नीलू अखिलेश कुमार ने ‘चौखंडी’ के वैशिष्ट्य का उद्घाटन करते हुए कहा, “चौखंडी केवल एक इतिहास-ग्रन्थ नहीं है; वह स्मृतियों में मौजूद इतिहास और समाज के बीच जटिल सम्बंधों को समझने का एक गंभीर प्रयास है .
इतिहास, कला एवं संस्कृति के अध्येता रौशन प्रकाश ने कहा कि ‘चौखंडी’ के जरिए भगवान बाबू का यह हस्तक्षेप हमें आज के दौर में चौखंडी की उपयोगिता, महत्व एवं प्रासंगिकता पर पुनर्विचार के लिए बाध्य करता है।
के महासचिव अनीश अंकुर ने कहा कि ‘चौखंडी’ के वार्ताकारों के बीच पैट्रिस लुमुम्बा जैसी विश्व हस्ती की चर्चा का उल्लेख कम्युनिस्टों के अंतर्राष्ट्रीयतावादी चरित्र को रेखांकित करता है
बिहार प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी सुदामा प्रसाद सिंह ने बेगूसराय की ऐतिहासिक जनतांत्रिक विरासत को पुस्तक में समेटने का एक छोटा किंतु सफल प्रयास बताया.


