@ राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने किया राष्ट्रपति भवन में सम्मानित, भोजपुरी जगत में है खुशी की लहर
भोजपुरी लोकसंगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बिहार के सुप्रसिद्ध लोकगायक भरत सिंह भारती को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इस सम्मान के बाद पूरे बिहार, खासकर भोजपुर जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
भोजपुर जिले के अगिआंव प्रखंड स्थित ननऊर गांव के रहने वाले भारत सिंह भारती पिछले कई दशकों से भोजपुरी लोकसंस्कृति और लोकगीतों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत गांव की कीर्तन मंडलियों से की थी और धीरे-धीरे अपनी मधुर आवाज तथा लोकधुनों के कारण पूरे बिहार ही नहीं बल्कि देशभर में पहचान बनाई।
बताया जाता है कि वर्ष 1962 से वे ऑल इंडिया रेडियो पटना से जुड़े रहे और अब तक एक हजार से अधिक भोजपुरी लोकगीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं। लोकगायन के साथ-साथ तबला, हारमोनियम, बांसुरी और सितार जैसे वाद्य यंत्रों में भी उनकी गहरी पकड़ रही है। भोजपुरी लोकपरंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पद्मश्री सम्मान मिलने की खबर जैसे ही भोजपुर जिले में पहुंची, उनके गांव ननऊर में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीण, परिजन और उनके चाहने वाले टीवी स्क्रीन से चिपक कर सम्मान समारोह देखते रहे। जैसे ही राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया, गांव में लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ खुशी व्यक्त की। कई लोगों की आंखें भावुक होकर नम हो गईं।
ग्रामीणों और सांस्कृतिक प्रेमियों का कहना है कि भरत सिंह भारती ने अपनी कला के माध्यम से भोजपुर की मिट्टी और भोजपुरी भाषा का सम्मान देशभर में बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि केवल एक कलाकार की सफलता नहीं, बल्कि पूरे भोजपुरी समाज और बिहार की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
लोकसंगीत विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब पारंपरिक लोकगीत धीरे-धीरे आधुनिक संगीत के बीच खोते जा रहे हैं, ऐसे समय में भरत सिंह भारती जैसे कलाकारों ने भोजपुरी संस्कृति को जीवित रखने का काम किया है। यही कारण है कि उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
भरत सिंह भारती की इस उपलब्धि से भोजपुर जिले के युवाओं में भी नया उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग उन्हें भोजपुरी लोकसंगीत का “संस्कृति प्रहरी” मान रहे हैं। उनके सम्मान से यह साबित हो गया है कि गांव की मिट्टी से निकली प्रतिभा भी मेहनत और समर्पण के बल पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है।
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