न्यूज़ डेस्क, विजय कुमार सिंह।।
20 मई को देशभर की सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी। ये बंद ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हो रहा है। बंद से पहले 16 मई से 19 मई तक सभी दुकानदार काला बिल्ला लगा कर सरकार की नीतियों के खिलाफ बिरोध दर्ज कराएँगे। आपको बता दे कि बंद की कई मुख्य वजहें हैं। जिसमें
ऑनलाइन फार्मेसी का विरोध
देश में 12.40 लाख से ज्यादा केमिस्ट का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के दवाएं बेच रही हैं। एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार इस्तेमाल हो रहा है और AI से बने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन से एंटीबायोटिक्स व नशीली दवाएं मिल रही हैं।
भारी डिस्काउंट
बड़े कॉर्पोरेट संस्थान ‘डीप डिस्काउंट’ देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इससे छोटे केमिस्टों की आजीविका खतरे में है और करीब 5 करोड़ लोगों के रोजगार पर संकट है।
जनस्वास्थ्य का खतरा
संगठन का कहना है कि बिना नियंत्रण दवा बिकने से ‘एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR)’ बढ़ रहा है। नकली दवाओं की बिक्री भी बड़ी समस्या है।
सरकारी नियम
कोविड के दौरान लागू G.S.R. 220(E) नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग है। AIOCD का कहना है कि कई बार मांग उठाने पर भी सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया।
कौन-कौन बंद में शामिल
देशभर के 12.40 लाख से ज्यादा थोक और खुदरा दवा विक्रेता इस एक दिन की हड़ताल में हिस्सा लेंगे। बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड, यूपी, बंगाल समेत कई राज्यों के केमिस्ट एसोसिएशन ने बंद का समर्थन किया है।
20 मई को दवा खरीदने में दिक्कत हो सकती है, इसलिए केमिस्ट संगठनों ने लोगों से जरूरी दवाएं पहले से खरीदकर रखने की अपील की है।
अगर 20 मई तक मांगें नहीं मानी गईं तो AIOCD ने अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

हड़ताल क्यों जायज हैं केमिस्टों का पक्ष जाने
रोजगार का संकट
AIOCD का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी और भारी डिस्काउंट से 12.40 लाख दुकानदार और उनसे जुड़े करीब 5 करोड़ लोगों की आजीविका खतरे में है। छोटे शहर-कस्बों के केमिस्ट दुकान बंद करने को मजबूर हो रहे हैं।
जनस्वास्थ्य का मुद्दा
आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के दवा बेचते हैं। एक ही पर्चे का बार-बार इस्तेमाल और AI से बने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन से एंटीबायोटिक्स व नशीली दवाएं आसानी से मिल रही हैं। इससे AMR यानी दवाओं का असर कम होने का खतरा बढ़ रहा है।
सरकार की अनदेखी
संगठन का दावा है कि कई बार ज्ञापन देने के बाद भी सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं की। इसलिए विरोध का लोकतांत्रिक तरीका हड़ताल ही बचा।
वहीं दूसरी ओर कुछ आम लोगों ने हड़ताल को गलत माना है। उनका कहना है कि
मरीजों को होगी परेशानी
दवा जरूरी सेवा है। एक दिन दुकान बंद रहने से आम लोगों, खासकर गंभीर मरीजों, बुजुर्गों को दिक्कत होगी। इमरजेंसी में दवा न मिलना जानलेवा भी हो सकता है।
कंपटीशन बनाम विरोध
ऑनलाइन फार्मेसी को सरकार ने लीगल किया है। कई लोगों का मानना है कि टेक्नोलॉजी और डिस्काउंट से आम आदमी को सस्ती दवा मिलती है। केमिस्टों को कंपटीशन से भागने की बजाय सर्विस बेहतर करनी चाहिए।
कुल मिलाकर केमिस्ट अपनी जगह सुरक्षा और रोजगार की बात कर रहे हैं, और आम लोग/सरकार मरीजों की सुविधा और लीगल कंपटीशन की बात कर रहे हैं।

