@ तीर्थकौल गांव में पसरा मातम, बालू खनन से बने गहरे गड्ढों और नदी घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
संदेश (भोजपुर), 17 अक्टूबर 2026। बिहार के भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र अंतर्गत तीर्थकौल गांव के पास सोन नदी में डूबने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे और एक 30 वर्षीय युवक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि नदी में नहाने के दौरान तीन बच्चे गहरे पानी में डूबने लगे। उन्हें बचाने के लिए नदी में उतरे युवक की भी डूबने से जान चली गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
मृतकों में तीन बच्चे और एक युवक शामिल
मृतकों की पहचान तीर्थकौल गांव निवासी सुधीर कुमार (30 वर्ष), प्रेम कुमार (12 वर्ष), शिवम कुमार (10 वर्ष) और आकाश शर्मा (15 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, प्रेम कुमार और शिवम कुमार सगे भाई थे। दोनों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सुधीर कुमार के पिता अरविन्द यादव और माता उषा देवी हैं। वहीं, प्रेम कुमार और शिवम कुमार के पिता मिंटू शर्मा तथा माता पिंकी देवी हैं। आकाश शर्मा के पिता विनोद शर्मा और माता सीमा देवी बताई गई हैं।
बच्चों को बचाने के लिए नदी में उतरा युवक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को तीन बच्चे सोन नदी में नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। बच्चों को संकट में देखकर सुधीर कुमार उन्हें बचाने के लिए नदी में उतर गए। हालांकि, पानी की गहराई और विपरीत परिस्थितियों के कारण वह भी डूब गए।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। काफी प्रयास के बाद चारों के शव नदी से बरामद किए गए। घटना के बाद मृतकों के घरों में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बालू खनन से बने गहरे गड्ढों पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद सोन नदी में बालू खनन से बने गहरे गड्ढों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जाता रहा है कि नदी के कई हिस्सों में बालू खनन के कारण 20 से 30 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। ऐसे स्थानों पर पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, जिससे नहाने के दौरान डूबने का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि, इस हादसे का बालू खनन से बने गड्ढों के साथ प्रत्यक्ष संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार, सोन नदी में डूबने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, गहरे पानी वाले स्थानों को चिह्नित करने और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की जरूरत है।
तीर्थकौल गांव की इस घटना ने एक बार फिर नदी घाटों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां चेतावनी संकेत, आवश्यक प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी उपाय किए जाएं, तो भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
फिलहाल चार लोगों की मौत से तीर्थकौल गांव शोक में डूबा है। एक युवक द्वारा बच्चों को बचाने के प्रयास में अपनी जान गंवाने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवारों के प्रति ग्रामीण संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
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