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“आओं चले संग्रहालय की ओर” विषय पर विशेष शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का बेगूसराय में आयोजन

न्यूज़ डेस्क, बेगूसराय, विजय कुमार सिंह।।

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आज बेगूसराय संग्रहालय में “आओं चले संग्रहालय की ओर” विषय पर विशेष शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत संग्रहालय विषयक संगोष्ठी, संग्रहालय भ्रमण, चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, कलाकारों एवं कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ कला लेखक सुमन कुमार, वरिष्ठ रंग निर्देशक डॉ. अनिल पतंग, संग्रहालय प्रभारी डॉ. कुंदन कुमार (के.पी. जायसवाल पुरातात्विक संग्रहालय, जी.डी. कॉलेज, बेगूसराय), सहायक प्राध्यापक डॉ. कुमारी रंजना, वरिष्ठ चित्रकार इंद्र मोहन प्रसाद तथा जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष श्याम कुमार सहनी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष श्याम कुमार सहनी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के महत्व तथा संग्रहालयों की भूमिका के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस प्रत्येक वर्ष 18 मई को मनाया जाता है तथा इसकी शुरुआत वर्ष 1977 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूज़ियम्स (ICOM) द्वारा की गई थी। इस वर्ष का विषय “Museums Uniting a Divided World” अर्थात “विभाजित विश्व को एक सूत्र में जोड़ते संग्रहालय” रखा गया है, जिसका उद्देश्य संग्रहालयों को संवाद, शिक्षा, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक एकता के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल प्राचीन वस्तुओं के संरक्षण का स्थान नहीं, बल्कि समाज को उसके इतिहास, परंपरा, कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाले जीवंत शैक्षणिक संस्थान हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने संग्रहालयों की उपयोगिता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा कला एवं इतिहास के अध्ययन में उनकी भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। वरिष्ठ कला लेखक सुमन कुमार ने कहा कि शिल्प अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है तथा शोधार्थियों को संग्रहालयों में संरक्षित कलाकृतियों के शिल्प एवं संरचना पर गहन अध्ययन करना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इस क्षेत्र में शिक्षा एवं शोध के नए आयाम प्राप्त हो सकें।

संग्रहालय प्रभारी डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, इतिहास एवं पुरातात्विक धरोहरों के प्रति जागरूक करना है, ताकि उनमें संरक्षण एवं संवर्धन की भावना विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि संग्रहालय समाज की स्मृतियों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने संग्रहालय, कला एवं शिल्प से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर वक्ताओं द्वारा सहज एवं ज्ञानवर्धक तरीके से दिया गया। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा संग्रहालय भ्रमण को प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक अनुभव बताया।

इसके उपरांत आयोजित चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी ने प्रतिभागियों का विशेष आकर्षण केंद्र बनी। संग्रहालय भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को संग्रहालय में सुरक्षित पुरातात्विक कलाकृतियों का अवलोकन कराया गया तथा प्रत्येक कलाकृति के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं कलात्मक महत्व के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें बेगूसराय एवं आसपास के क्षेत्रों की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया गया।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. सनोज रवि ने किया, जबकि प्रदर्शनी सहयोगी के रूप में मनीष कौशिक ने योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संग्रहालयों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

By National News Today

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