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भोजपुर में खनन विभाग गांव वालों की सेहत से कर रहा है खिलवाड़, सड़क पर बालू लदे ट्रकों की धूल से फैल रही गंभीर बीमारियां।

@ भोजपुर खनन विभाग सरकार को हर साल दे रहा अरबों रुपए का राजस्व, लेकिन सड़कों पर उड़ रहे धूल पर पानी छिड़काव के लिए खनन विभाग के पास नहीं है पैसा।

न्यूज़ डेस्क, आरा/भोजपुर, बबलू कुमार।।

भोजपुर जिले में खनन विभाग द्वारा राजस्व बढ़ाने की होड़ अब ग्रामीणों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। सकडी–नासरीगंज सड़क पर दिन-रात बालू लदे ट्रकों की लंबी कतारें दौड़ रही हैं, जिनसे उड़ने वाली धूल ने सड़क किनारे बसे गांवों तरारी सहार, संदेश और कोईलवर प्रखंड के सड़क किनारे सभी गांव को बीमारी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और खनन विभाग केवल सरकार के खनन विभाग के राजस्व वसूली में व्यस्त हैं, जबकि क्षेत्र की आम जनता धूल और प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर है।


दरअसल आपको बताते चले कि सकडी से नासरीगंज जाने वाली यह सड़क इन दिनों बालू ढोने वाले भारी ट्रकों के कारण धूल का अड्डा बन चुकी है। सैकड़ों की संख्या में गुजरने वाले ट्रकों से इतनी धूल उड़ती है कि सड़क के किनारे बसे गांवों में दिन में भी धुंध जैसा माहौल बन जाता है। घरों के आंगन, पेड़-पौधे, खेत और यहां तक कि लोगों के खाने-पीने की चीजें भी धूल की मोटी परत से ढक जाती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन विभाग द्वारा कभी भी खानापूर्ति के लिए पानी का छिड़काव नहीं करता है। क्षेत्र के लोगों ने कहा आज तक कभी भी बालू खनन भोजपुर और बालू ठेकेदारों के द्वारा पानी का छिड़काव नहीं किया गया है। जबकि खनन विभाग की नियमावली में है कि जिस क्षेत्र से खनन हो रहा है वह क्षेत्र के आम लोगों को बचाने के लिए नियमित पानी का छिड़काव करना जरूरी होता है।

साथ ही लोग कहते हैं ट्रकों की रफ्तार और संख्या इतनी ज्यादा है कि कुछ ही मिनटों में धूल का गुबार पूरे इलाके को ढक लेता है। सड़क किनारे लगे बड़े पेड़ों पर धूल से उसमें फल नहीं लग रहे हैं किसान परेशान है कि साल में एक बार आने वाले आम और कटहल का फल नहीं लग रहे हैं इसका कारण सड़कों पर चल रहे ट्रक से उड़ रहे धूल है।

बढ़ रही सांस और त्वचा की बीमारियां

सकड़ी नासरीगंज सड़क किनारे बसे गांवों के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सांस, खांसी, दमा और आंखों में जलन जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि सुबह घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि हर समय धूल उड़ती रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, “दिन भर ट्रकों का काफिला चलता रहता है। जब कोई ट्रक गुजरता है तो पूरा गांव धूल में डूब जाता है। बच्चों को खांसी और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी है।”

भोजपुर जिला प्रशासन और खनन विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भोजपुर जिले में खनन से हर साल अरबों रुपये का राजस्व बिहार सरकार के खाते में जा रहा है, तो फिर स्थानीय लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामीणों का आरोप है कि भोजपुर खनन विभाग और भोजपुर जिला प्रशासन दोनों इस समस्या को जानते हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
साथ ही ग्रामीणों ने कहा कि हमें बताया जाता है कागजों पर पानी का छिड़काव दिखाकर खनन विभाग और जिला प्रशासन जिम्मेदारी पूरी कर ली जाती है, जबकि हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई बार ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। वहीं संदेश प्रखंड के ग्रामीण जनता ने कहा कि भोजपुर जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी राजकुमार के द्वारा प्रखंड के चिलोहस पंचायत में लगे जनता दरबार में उन्होंने आश्वासन दिया था कि मैं अपने पैसे से पानी का छिड़काव करने के लिए मशीन खरीद कर सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाएगा लेकिन जिलाधिकारी राजकुमार के चले जाने के बाद भी आज तक सकडी नासरीगंज सड़क पर उड़ रहे धूल से निजात पाने के लिए जिला प्रशासन और खनन विभाग भोजपुर के द्वारा पानी का छिड़काव नहीं किया जाता है।

सकड़ी नासरीगंज सड़क भी हो रही बर्बाद

लगातार भारी ट्रकों के चलने से सकडी–नासरीगंज सड़क की हालत भी तेजी से खराब होती जा रही है। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और सड़क धूल की मोटी परत से ढकी रहती है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार का राजस्व बढ़ाने का मतलब यह है कि गांव वालों की जिंदगी और सेहत से खिलवाड़ किया जाए? अगर खनन से सरकार को फायदा हो रहा है, तो क्या उस क्षेत्र के लोगों को साफ हवा और सुरक्षित जीवन का अधिकार नहीं है?
सड़क किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही ट्रकों पर नियंत्रण, नियमित पानी का छिड़काव और सड़क की मरम्मत नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
भोजपुर जिले में खनन से निकलने वाला बालू भले ही सरकार के खजाने को भर रहा हो, लेकिन सकडी–नासरीगंज सड़क के किनारे बसे गांवों के लिए यह बालू अब बीमारी और परेशानी का कारण बन चुका है। प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही के बीच ग्रामीणों की पीड़ा हर गुजरते ट्रक के साथ और गहरी होती जा रही है।

By National News Today

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