‘विकसित पंचायत, विकसित बेगूसराय’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी), कंकौल में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण के तीसरे दिन शुक्रवार को तेघड़ा, चेरियाबरियारपुर एवं छौड़ाही प्रखंड के पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों का उन्मुखीकरण किया गया। प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण सत्र में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. गोपाल मिश्रा, गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. संजय सिंह, आयुष्मान भारत के जिला समन्वयक प्रभात कुमार एवं बीसीएम अमरजीत कुमार ने पंचायत प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में पंचायतों की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, कुपोषण उन्मूलन, पात्र लाभुकों का आयुष्मान कार्ड एवं प्रत्येक नागरिक की आभा आईडी बनवाने को जीपीडीपी में प्राथमिकता देने की बात कही।
राष्ट्रीय पोषण माह, एनीमिया मुक्त भारत एवं टीबी मुक्त पंचायत अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने तथा ‘जांच आपके द्वार’ के माध्यम से बीपी एवं मधुमेह की पहचान पर भी बल दिया गया। साथ ही फाइलेरिया एवं कालाजार की रोकथाम और किशोरियों में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाने की बात कही गई। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।
पीरामल फाउंडेशन के दीपक मिश्रा, गणेश कम्बे सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा ही पंचायत के वास्तविक विकास का पैमाना है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को ‘स्वस्थ ग्राम’ निर्माण की सामूहिक शपथ दिलाई गई। मौके पर डीपीआरसी के नोडल पदाधिकारी प्रवीण कुमार, रवि कुमार, मीनू कुमारी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता संजय कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे।
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