बेगूसराय ::–
विजय श्री ::–
12 अगस्त 2020 बुधवार
नई शिक्षा नीति के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के तहत छात्र संगठन आइसा ने नई शिक्षा नीति की प्रति जलाकर विरोध किया।
अंबेडकर चौक स्थिति संगठन के जिला कार्यालय में लॉकडाउन का पालन करते हुए मनाया। राष्ट्रीय विरोध दिवस के इस मौके पर छात्र नेता फ़हीम आलम ने कहा कि नई शिक्षा नीति में समाजिक न्याय व नियामक निकायों में हाशिए पर रखे गए। समुदायों के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने, जनसाधारण के लिए व्यापक पैमाने पर उपलब्ध सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को तबाह करने, निजी व सार्वजनिक संस्थानों के लिए एक जैसे ही नियम लागू करने जैसे भेदभावपूर्ण नीति शामिल है।
उन्होंने कहा कि देश के छात्रों की लोकप्रिय मांग समान स्कूल प्रणाली लागू करने की रही है। लेकिन सरकार हमारी मागों को अनसुनी करके उल्टे शिक्षा के बजट में कटौती करती आ रही है .जिससे गरीब वर्ग के छात्र, उच्च शिक्षा से बेदखल हो रहे है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के लोकप्रिय लोकतांत्रिक मूल्यों का गलाघोंट कर तेजी से शिक्षा की निजीकरण की और बढ़ रही है. जिसके खिलाफ आइसा आर-पार की लड़ाई लड़ रही है.
आइसा नेता रोमन रॉय ने कहा कि मोदी सरकार ने गैर लोकतांत्रिक तरीके से सांसद में बिना बहस किये नई शिक्षा नीति को आनन फानन में पारित कर दिया गया है। सरकार का कहना है की नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को आसान बनाना है। लेकिन अगर गहराई से अध्ययन किया जाए तो इस नीति का उद्देश्य विपरीत है। नई शिक्षा नीति समाज में सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को बहिष्कृत करने की नीति है।
यह नीति देश में शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर करेगी और गरीब जनता जिसका बड़ा तबका पहले से ही शिक्षा से बाहर है, उसे शिक्षा में समाहित करने के बजाए ये उन्हें शिक्षा से और दूर करेगी। यह नीति आमलोगों से शिक्षा को छीनकर कारपोरेट व विदेशी विश्वविद्यालयों के हवाले करने वाली है। जिसे छात्र संगठन आइसा बर्दास्त नही करेगी। आइसा मांग करती है कि आम लोगों से शिक्षा को छीन लेने वाली नई शिक्षा नीति तुरंत वापस ली जाए और इसपर संसद में व्यापक बहस हो।
मौके पर सोनू फर्नाज़, दिवाकर कुमार, संकेत कुमार, सन्नी कुमार, रौशन कुमार ने भी अपनी बातों को रखा।

