बेगूसराय ::–
विजय श्री ::–
30 जुलाई 2020 गुरुवार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक शिक्षा के व्यवसायीकरण निजीकरण एवं शिक्षा के मौलिक अधिकारों को कमजोर करने की नीति है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को योजना आयोग के ही तर्ज पर समाप्त कर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त कर दी गई है।
शिक्षा के जनतांत्रिक चरित्र को समाप्त कर सत्ता केंद्रित अधिकारों का केंद्रीकरण कर दिया गया है। अभी तक भारत के संविधान में शिक्षा समवर्ती सूची में रहने के कारण राज्य का विषय था। लेकिन केंद्र सरकार राज्य की संवैधानिक स्वायत्तता का अपहरण कर रही है। कोठारी आयोग द्वारा अनुशंसित शिक्षा पर राष्ट्रीय आय का 6% अभी तक केंद्र की सरकार व्यय करने का राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं दिखा रही है।
आंगनबाड़ी केंद्रों को समाज कल्याण विभाग से हटाकर शिक्षा मंत्रालय के अधीन इसलिए लाया गया है कि आंगनबाड़ी के लिए आवंटित बजट को जोड़कर 6% व्यय करने का धूर्ततापूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जब तक समान शिक्षा प्रणाली लागू नहीं की जाएगी तब तक न तो सबों को शिक्षा मिल पाएगा और ना कभी हमारा देश ज्ञान की शक्ति ही बन पाएगी।
उपर्युक्त बात है नई शिक्षा नीति के विरोध में अपने कार्यालय में ही प्रतिरोध के माध्यम से विरोध करते हुए एआईएसएफ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अमीन हमजा एवं जिला अध्यक्ष सजग सिंह ने संयुक्त रूप से कहा।
ज्ञात हो कि नई शिक्षा नीति 2020 पर पिछले दिनों कैबिनेट ने मुहर लगाई। शिक्षा नीति में विश्व विद्यालय की छात्रावासों को खत्म करने की बात कही गई, इसी के विरोध में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन बेगूसराय में डिस्टेंस का पालन करते हुए फेस में मास्क लगाकर अपने विभिन्न मांगों को लेकर नई शिक्षा नीति का विरोध किया।
इस दौरान एआईएसएफ के जिला मंत्री किशोर कुमार ताइक्वांडो के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी कैसर रेहान ने साफ तौर पर कहा कि नई शिक्षा नीति गरीबों को शिक्षा से वंचित करने की नीति है। हमारा संगठन मांग करता है कि शिक्षा पर बजट का दसवां हिस्सा खर्च हो, और देश के अंदर समान शिक्षा प्रणाली लागू हो। चाहे वह अमीर का बच्चा हो या गरीब का। सबों को एक समान शिक्षा मिलनी चाहिए और यह नई शिक्षा नीति बिल्कुल इसके विपरीत है इसलिए हम उसका विरोध करते हैं।


