Wed. Feb 11th, 2026

 उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर के प्रधान पूजारी के निधन से इलाके में शोक की लहर

ब्यूरो प्रमुख – चंद्र प्रकाश राज 

उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर के प्रधान पूजेरी के निधन से इलाके में शोक की लहर

कोठिया-

नरांव सारण स्थित उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर सह राम जानकी मंदिर के प्रधान पूजारी का आसमय निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनो से बीमार थे। जिनका इलाज पटना स्थित नीजी नर्सिंग होम मे चल रहा था।पिछले महिने हाॅस्पीटल से डिस्चार्ज हो मंदिर आये थे।

शुक्रवार 03 जुलाई 2020 गोधुली वेला मे उन्होंने अंतिम श्वास लिया और इस माया लोक को छोड ब्रम्हलोक चल दिए। उनकी उम्र लगभग 60 वर्ष थी। ज्ञात हो की 6 सितंबर 2016 मंगलवार को वयोवृद्ध सप्तऋषि श्री श्री 1008 श्री सीताराम दास जी महाराज 101 वर्ष के उम्र मे स्वर्ग सिधारे थे। इसके बाद उनके प्रिय शिष्य श्री श्री 108 श्री मनोहर दास जी महाराज को सूर्यमंदिर के प्रधानपूजेरी की गद्दी मिली और उन्हे प्रधान पूजेरी के रूप मे हजारो भक्तो व संत समाज के बीच चादर देकर सम्मानित किया गया और मंदिर की जिम्मेदारी सौंपी गयी।

लेकिन वे पाॅच वर्ष के अन्दर ही स्वर्ग सिधार गये। जिसके वजह से आस-पास का ग्रामिणो व संत समाज मे शोकाकुल माहौल है। उनके निधन के बाद से ही लगभग पांच पंचायत के दर्जनो गाॅवों के नर-नारी ,संत व बच्चों का आगमन उनके अंतिम दर्शन के लिए शुरू हो गया।इसके साथ ही रात भर भजन किर्तन चलता रहा और भक्त कतारबद्ध हो सोशल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए उनका अंतिम दर्शन करते रहे।

शनिवार शनिवार 4 जुलाई को दोपहर तक भक्तो के द्वारा दर्शन करने व भजन किर्तन का शिलशिला चलता रहा। उसके बाद उनके पार्थिव शरीर को ब्रम्हलीन होने के लिए जल समाधि देने हेतु गंगा तट ले जाया गया। इस यात्रा मे COVID-19 कोरोना के वजह से बहुत ही अल्प सदस्यों व सेवक समाज ने हिस्सा लिया।

2016 मे दिवंगत संत के पार्थिव शरीर को जल समाधि देने हेतु अंतिम यात्रा मे एक लाख से अधिक भक्तो ने हिस्सा लिया था। जिसमे एक दर्जन संतो के साथ रथ, हाथी, घोड़ा, ऊॅट, बैण्ड, बाज भी सामिल था। लेकिन इस बार कोई शोभा यात्रा नहीं निकालने का निर्णय सूर्य मंदिर प्रवंधन ने लिया और सामान्य ढंग से उनको अंतिम विदाई दी गई। चंद सदस्यो व संतो ने उनके पार्थिव शरीर को गंगा नदी मे वैदिक रिति से अर्पित किया।

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