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सीवान के लाल गौरी शंकर ने फिल्मी दुनियां में एक्टिंग कर जिले का नाम किया रौशन

सारण – छपरा कार्यालय – 10 जून , बुधवार ,

ब्यूरो प्रमुख –  चंद्र प्रकाश राज ,

रिपोर्ट –  धर्मेन्द्र रस्तोगी ,

सीवान के लाल गौरी शंकर ने फिल्मी दुनियां में एक्टिंग कर जिले का नाम किया रौशन

सिवान/नबीगंज

बचपन में देखें सपनों को साकार करते हुए जिले ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपने संघर्ष के बदौलत प्रतिभा का लोहा मनवा रहा सीवान जिलान्तर्गत लकड़ी नबीगंज प्रखंड के गोपालपुर कोठी गांव निवासी उत्तिम ठाकुर के पुत्र गौरी शंकर ठाकुर ने चकाचौंध वाली दुनियां मुंबई में टेली फ़िल्म में मोहन का किरदार निभा कर रहा हैं नाम रौशन।

महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व वर्ती छात्र सह युवा फ़िल्मकार राकेश विक्रम सिंह के निर्देशन में बनी शॉर्ट फ़िल्म दी लास्ट इब्ब (the last ebb) में इन्होंने मोहन का किरदार बखूबी निभाया है। जिसे दर्शकों का प्यार व स्नेह खूब मिल रहा है इस शॉर्ट फ़िल्म में देश के लाखों ग़रीब, लाचार व बेसहारा लोग किस तरह से सेठ साहूकारों के चंगुल में फंस जाते है तथा इनके चुंगल से नहीं निकल पाते है को फ़िल्म के माध्यम से दिखाया गया है।

इसी तरह के मुद्दों को जीवंत करने का बीड़ा देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बनाने वालें व अहिंसा के पुजारी मोहनदास करमचंद गांधी के नाम पर स्थापित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में पढ़ाई कर रोजी रोटी की तलाश में जुटे नाट्य संकाय के छात्रों द्वारा एक शॉर्ट फ़िल्म का निर्माण किया गया हैं।

इस फ़िल्म के संबंध में लॉकडाउन के दौरान गौरीशंकर ठाकुर ने बताया कि परफार्मिंग आर्ट के छात्र होने के नाते हमने फ़िल्म में मोहन का किरदार जीवंत करने की कोशिश की है, जिसे दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया है। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन से ही पढ़ने व नाटक खेलने का शौक रहा है जिसके कारण पढ़ाई के दौरान कब मैं वर्धा पहुंचा पता ही नहीं चला और अभी भी एक्टिंग के साथ ही एमफिल भी कर रहा हूं।

मालूम हो कि सारण, सिवान व गोपालगंज ज़िले के सीमा पर अवस्थित लकड़ी नबीगंज प्रखंड के गोपालपुर कोठी गांव विकास से कोसो दूर होने के बावजूद नित नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा हैं तीन भाइयों वाले गौरीशंकर से बड़े भाई प्रमंडलीय मुख्यालय सारण के छपरा सदर अस्पताल छपरा में चिकित्सक के रूप में पदस्थापित हैं तो इनसे छोटा भाई है व्यवसाय कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते है।

इनके कामयाबी को लेकर क्षेत्र के बुद्धिजीवी व सामाजिक कार्यकर्ताओं में काफ़ी ख़ुशी देखी जा रही हैं और इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे है।

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