बेगूसराय ::–
विजय श्री ::–
8 जून 2020 सोमवार
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत STET परीक्षा रद्द व शैक्षणिक अराजकता के खिलाफ चलाये जा रहे चरणबद्ध आंदोलन के तहत ईमेल भेजो अभियान के तहत आज हजारों छात्र छात्राओं के द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री ,उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को ईमेल के द्वारा मांग पत्र भेजा गया व आक्रोश व्यक्त किया गया।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत आज लोहियानगर में एबीवीपी जिला कार्यालय में उपस्थित पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य अजीत चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा को लेकर भेदभाव कर रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति किया जा रहा है। सरकार वोट बैंक की राजनीति कर रही है। लॉक डाउन के वजह से पूरी तरह से शिक्षा व्यवस्था चौपठ हो गया है। शिक्षा को लेकर सरकार का नीति व नियत दोनों स्पष्ट नही है। सरकार विद्यार्थियों को भ्रम की स्थिति में रखना चाहती है। इससे लाखों छात्र छात्राओं का भविष्य अंधकार मय है।
मौके पर उपस्थित प्रदेश कार्यकारणी सदस्य सोनू सरकार व प्रान्त छात्रावास कल्याण सह प्रमुख मुकेश कुमार ने कहा कि सुशासन के 15 वर्षों के शासनकाल में भर्ती हेतु जो परीक्षाएं हुए हैं। उसमें से 95% से अधिक परीक्षाएं विवादों में रहा आखिर इसके लिए कौन है जिम्मेदार?स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय शिक्षक विहीन होते जा रहे हैं ।बिना शिक्षक का छात्र कैसे पढ़ रहे हैं ।इसके जिम्मेदार कौन है? ना समय से परीक्षा हो रही है, ना समय से परिणाम आ रहे हैं। न समय से वर्ग का संचालन हो रहे हैं। आखिर इसके जिम्मेदार कौन हैं।
GD कॉलेज छात्र संघ अध्यक्ष पुरषोतम कुमार व नगर कार्यकारणी सदस्य राहुल कुमार ने कहा कि अभाविप का आगामी कार्यक्रम 11 जून को छात्रों का शिक्षण शुल्क माफ् करने के लिए बिहार सरकार को खुला पत्र लिखा जायेगा, 13 जून को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के लिए जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिया जाएगा और 15 जून को शैक्षणिक संस्थान के गेट पर सांकेतिक प्रदर्शन किया जायेगा।
विश्वविद्यालय प्रतिनिधि आदित्य कुमार व प्रदेश कार्यकारणी सदस्य आज़ाद कुमार ने कहा कि सरकार के गलत नीति, हठधर्मी ,राजनीतिक द्वेष के कारण हजारों छात्र युवाओं का भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहे हैं।आखिर उच्च स्तरीय जांच का आदेश क्यों नहीं।दोषी बोर्ड के अध्यक्ष को क्यों नही हटाया गया ।भ्रष्ट पदाधिकारियों के ऊपर करवाई क्यों नहीं किया गया। पदाधिकारियों को बचाने में सरकार क्यों लगी है।अपने निर्णय पर सरकार पुनर्विचार करें।अन्यथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद चरणबध्द आंदोलन जारी रहेगा।

